पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दशकों से सुलग रहा तनाव अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। शुक्रवार की दरमियानी रात दोनों देशों के बीच भीषण सैन्य टकराव शुरू हो गया। पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कंधार और पक्तिया में बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक की। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी रात में पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर ताबड़तोड़ हमले किए। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है।
‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ और खुली जंग का ऐलान
पाकिस्तान ने अपने हवाई अभियान को ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ नाम दिया है। इस कार्रवाई में 133 अफगान तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब दोनों देशों के बीच खुली जंग है। दूसरी ओर अफगानिस्तान ने दावा किया है कि जवाबी कार्रवाई में 50 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।
राष्ट्रपतियों और तालिबान की कड़ी प्रतिक्रिया
हमलों के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि देश की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा। वहीं अफगान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने जोरदार पलटवार की चेतावनी दी। अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 26 फरवरी की रात हुए हमलों में महिलाओं और बच्चों की जान गई है और उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया है। कतर की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम भी अब खतरे में बताया जा रहा है।
डूरंड रेखा: 1893 से चली आ रही जड़
दोनों देशों के बीच संघर्ष की सबसे बड़ी वजह 1893 में खींची गई डूरंड रेखा है। 2,640 किलोमीटर लंबी इस सीमा को 12 नवंबर 1893 को ब्रिटिश इंडिया के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुल रहमान खान के बीच समझौते से तय किया गया था।
यह रेखा ब्रिटिश साम्राज्य की ‘ग्रेट गेम’ रणनीति का हिस्सा थी, जिसका मकसद रूस को भारत की ओर बढ़ने से रोकना था। अफगानिस्तान आज भी डूरंड लाइन को मान्यता नहीं देता, क्योंकि उसके मुताबिक इसने पश्तून और बलूच कबीलों को दो हिस्सों में बांट दिया। पाकिस्तान ने 2017 में इस सीमा पर कांटेदार तार लगा दिए थे, जिसका तालिबान सरकार ने 2021 में सत्ता में आने के बाद विरोध किया।
TTP बना दूसरी बड़ी वजह
तनाव की दूसरी बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP को पनाह दे रही है। 2007 में लाल मस्जिद ऑपरेशन के बाद बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में TTP का गठन हुआ, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंकना था।
2001 में अमेरिका के ‘वॉर ऑन टेरर’ के दौरान कई आतंकी संगठन अफगानिस्तान से निकलकर पाकिस्तान के कबायली इलाकों में शरण लेने लगे। बाद में यही क्षेत्र आतंकवाद का गढ़ बन गया, जहां से पाकिस्तानी सेना पर हमले होते रहे।
FATA का अंत और सीधे आमने-सामने टकराव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कभी FATA (फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज) एक बफर जोन की तरह काम करता था। 1901 में लागू ‘फ्रंटियर क्राइम्स रेगुलेशन’ (FCR) के तहत यह इलाका अलग प्रशासनिक व्यवस्था में था। 2018 में पाकिस्तान ने FATA को खैबर पख्तूनख्वा में विलय कर दिया। इसके बाद दोनों देशों की सीमाएं सीधे सट गईं और बफर जोन खत्म हो गया।
अब हालात ऐसे हैं कि सीमा पर कोई भी तनाव सीधे सैन्य टकराव में बदल जाता है। मौजूदा हालात ने दोनों परमाणु-संपन्न पड़ोसियों को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है, जिससे पूरी दुनिया चिंतित है।
